राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल के बेटों की ‘फर्जी’ कंपनियों का जाल

विवेक डोभाल (बायें) की हेज फंड कंपनी अपने भाई शौर्य के कारोबार से जुड़ी है. शौर्य बीजेपी के नेता हैं जो इंडिया फाउंडेशन के प्रमुख हैं.

विवेक डोभाल (बायें) की हेज फंड कंपनी अपने भाई शौर्य के कारोबार से जुड़ी है. शौर्य बीजेपी के नेता हैं जो इंडिया फाउंडेशन के प्रमुख हैं.

कारवां को ब्रिटेन, अमेरिका, सिंगापुर और केमैन आइलैंड से प्राप्‍त व्यापार दस्तावेजों से पता चला है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल केमैन आइलैंड में हेज फंड (निवेश निधि) चलाते हैं. केमैन आइलैंड टैक्स हेवन के रूप में जाना जाता एक सुरक्षित हेवेन एसेट क्या है? है. यह हेज फंड 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी की घोषणा के महज 13 दिन बाद पंजीकृत किया गया था. विवेक का यह व्यवसाय उनके भाई शौर्य डोभाल के व्यवसाय से जुड़ा है. शौर्य भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और मोदी सरकार के करीब माने जाने वाले थिंक टैंक इंडिया फाउंडेशन के प्रमुख हैं. विवेक डोभाल की यह कंपनी उनके पिता अजीत डोभाल की उस सार्वजनिक अभिव्यक्ति के खिलाफ जाती है जिसे उन्होंने 2011 में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में व्यक्त किया था. रिपोर्ट में अजीत डोभाल ने टैक्स हेवन और विदेशी कंपनियों पर कड़ाई से रोक लगाने की वकालत की थी.

विवेक डोभाल चार्टर्ड वित्तीय एक सुरक्षित हेवेन एसेट क्या है? विश्लेषक हैं. वे ब्रिटेन के नागरिक हैं और सिंगापुर में रहते हैं. विवेक जीएनवाई एशिया फंड नाम की हेज फंड के निदेशक हैं. 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार डॉन डब्लू. ईबैंक्‍स और मोहम्मद अल्ताफ मुस्लिअम वीतिल भी इसके निदेशक हैं. ईबैंक्‍स का नाम पेराडाइस पेपर्स में भी आया था. वे केमैन आइलैंड में रजिस्टर्ड दो कंपनियों के निदेशक हैं. ईबैंक्‍स पहले केमैन सरकार के साथ काम किया करते थे और उसके वित्त मंत्री और अन्‍य मंत्रियों को सलाह देते थे. मोहम्मद अल्ताफ लूलू ग्रुप इंटरनेशनल के क्षेत्रीय निदेशक हैं. यह कंपनी पश्चिम एशिया में तेजी के साथ विस्तार कर रही हाइपरमार्किट चेन है. जीएनवाई एशिया फंड के कानूनी पते के अनुसार, यह वॉर्क्‍स कारपोरेट लिमिटेड से संबंधित कंपनी है जिसका नाम पनामा पेपर्स में आया था.

कारवां को विवेक और बडे़ भाई शौर्य की कंपनियों के बीच प्रशासनिक संबंध का पता चला है. शौर्य के भारतीय व्यवसायों से संबंधित बहुत से कर्मचारी जीएनवाई एशिया और उसकी कंपनियों के साथ करीब से जुड़े हैं. दोनों भाइयों के कारोबार के तार सऊदी अरब के सत्तारूढ़ परिवार सऊद घराने से जुड़े हैं.

2011 में गुप्तचर विभाग के पूर्व निदेशक अजीत डोभाल ने भारतीय जनता पार्टी को विदेश में भारतीय काला धनः गुप्त बैंकों और टैक्‍स हेवन नाम की रिपोर्ट दी थी. यह रिपोर्ट डोभाल ने एस गुरुमूर्ति के साथ तैयार की थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक गुरुमूर्ति फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक हैं. इस रिपोर्ट में टैक्‍स हेवनों पर कड़े कदम उठाने की बात है.

विवेक डोभाल की हेज फंड कंपनी जीएनवाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नोटबंदी की घोषणा के 13 दिन बाद अस्तित्व में आई.

कौशल श्रॉफ स्वतंत्र पत्रकार हैं एवं कारवां के स्‍टाफ राइटर रहे हैं.

महंगाई ने उड़ा दिया सोने का रंग! अब निवेशकों को क्या करना चाहिए? समझिए असली कहानी

क्या अब सोने की रंगत उड़ चुकी है? ऐसे में निवेशकों को क्या करना चाहिए?

क्या अब सोने की रंगत उड़ चुकी है? ऐसे में निवेशकों को क्या करना चाहिए?

ग्लोबल मार्केट्स गिरने के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी नहीं आई. सोना भी बाजारों के साथ गिरता ही रहा. आमतौर पर ऐसा नही . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : September 07, 2022, 14:07 IST

हाइलाइट्स

कुछ विशेषज्ञों को आर्थिक मंदी की संभावनाएं नजर आती हैं.
कुछ का कहना है कि कोविड से पार करके आगे उज्ज्वल भविष्य है.
ऐसे में निवेशकों को अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए निवेश करना चाहिए.

निखिल वालवलकर, नई दिल्ली. 2022 आम वर्षों की तरह नहीं है. रूस-यूक्रेन संकट के चलते इस वर्ष दुनियाभर में महंगाई चरम पर पहुंची तो शेयर बाजार भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. महंगाई पर काबू पाने के लिए दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की. इतिहास पर नजर डालें तो, जब-जब ऐसे हालात बने हैं, तब-तब सोना (Gold) एक सेफ हेवन (निवेश का सुरक्षित विकल्प) बना है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.

इस बार हमने देखा कि ग्लोबल मार्केट्स गिरने के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी नहीं आई. सोना भी बाजारों के साथ गिरता ही रहा. ये स्थिति चूंकि कुछ अलग है तो निवेशक इस बात को लेकर घबराए हुए हैं. तो क्या अब ये समझा जा सकता है कि गोल्ड अब एक सेफ हेवन नहीं (Safe haven) है?

सोने ने खुद को साबित किया!
हाल ही में सोने ने खुद को प्रूव भी किया है कि लोग उसे सेफ हेवन क्यों कहते हैं. मार्च-अगस्त 2020 के बीच में सोने की कीमत 1,471 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 2,063 डॉलर पहुंच गई थी. यह वो समय था, जब दुनियाभर के बाजारों पर कोरोना का कहर बरप रहा था. इसी साल फरवरी से मार्च के बीच जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया, तब हमने इसे 1,797 डॉलर से बढ़कर 2,050 डॉलर तक जाते देखा.

1980 में इसकी कीमत 711 डॉलर के रिकॉर्ड पर पहुंची और फिर लम्बे समय तक गिरावट देखी गई. इसके बाद 2006 में सोने की कीमतों ने एक बार फिर नया हाई बनाया. सोने का वोलाटाइल बिहेवियर ऐसा है कि निवेशकों द्वारा इसके बारे में ठीक-ठीक अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल हो गया है. परंतु एक बात तो तय है कि यह निवेशकों के पेशेंस को जरूर परखता है.

शेयर बाजार के साथ कम ही चलता है सोना!
सोना और शेयर बाजार को अधिकतर बार एक-दूसरे के उलट चलते ही देखा गया है. बहुत कम बार ऐसा हुए है कि दोनों एसेट एक ही दिशा में चले हों. उदाहरण के लिए, 2017 में जब निफ्टी 50 और S&P 500 इंडेक्सों ने 29 फीसदी और 22 फीसदी का रिटर्न दिया था, उसी दौरान गोल्ड ने भी 6 फीसदी रिटर्न दिया.

इसी तरह, 2018 में S&P 500 ने 4 फीसदी की गिरावट दिखाई और निफ्टी लगभग 3 फीसदी चढ़ा, तब गोल्ड ने 8 फीसदी रिटर्न दिया. 2022 की ही बात करें तो 31 जुलाई तक निफ्टी 50 और S&P 500 ने 9 और 8 फीसदी की गिरावट दिखाई तो गोल्ड केवल 1 फीसदी की बढ़ पाया है. शॉर्ट टर्म बॉन्ड्स में भी लगभग 2 फीसदी की गिरावट आई है, क्योंकि आरबीआई ने ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है.

बेसिक पर लौटना होगा!
इन दिनों हमें एकतरफा विचार सुन रहे हैं. कुछ लोग महंगाई और मंदी को लेकर चिंतित नजर आते हैं तो कुछ को बहुत उज्ज्वल भविष्य नजर आता है, क्योंकि हमने कोविड को पीछे छोड़ दिया है. इनके पीछे अलग-अलग तर्क हैं, लेकिन हमें बेसिक्स को भूलना नहीं चाहिए.

ट्रस्ट म्यूचुअल फंड के संदीप बागला ने कहा, “हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि आर्थिक मंदी की संभावनाएं है, लेकिन इसका कोई स्पष्ट प्रमाण दिखता नहीं. वेजेज और गैस प्राइस ऊपर जा रहे हैं और लेबर मार्केट में कोई पुअर सेंटीमेंट भी नहीं दिखते हैं.” इसके बाद उन्होंने कहा, “महंगाई के बावजूद गोल्ड का प्राइस डॉलर्स में गिरा है, क्योंकि डॉलर मजबूत हुआ है. ब्याज एक सुरक्षित हेवेन एसेट क्या है? दरों में इजाफा एकदम से महंगाई को नीचे नहीं ला सकता. इसलिए, अभी के लिए, मार्केट वेट एंड वॉच की स्थिति में है और कुछ समय बाद ही स्थितियां साफ होंगी.”

तो निवेशकों को क्या करना चाहिए?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि निवेशकों को क्या करना चाहिए? तो समझ लीजिए कि यह ऐसा समय है जब आपको शोर-शराबे को नहीं सुनना है और अपने वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना है. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर COVID-19 के सभी दुष्प्रभावों के हटने में कितना समय लगेगा, इस बारे में शायद ही कोई विशेषज्ञ सही साबित हो. यदि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को और बढ़ाया जाता है, तो यह अर्थव्यवस्था में मांग प्रभावित होगी, कॉर्पोरेट आय घटेगी और स्टॉक की कीमतें भी गिरेंगी.

साथ ही, ऊंची ब्याज दरों का प्रभाव तुरंत देखने को नहीं मिलेगा. मुद्रास्फीति को शांत होने में कुछ समय लग सकता है और इससे एसेट्स की कीमतों में और अस्थिरता आ सकती है. इन कारकों पर एक निवेशक का कोई नियंत्रण नहीं होता है, इसलिए अपने वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना सबसे अच्छा है. अपने एसेट एलोकेशन पर टिके रहने और डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में निवेश करने से मदद मिलनी चाहिए.
बागला ने कहा, “यदि आप समझते हैं कि मुद्रास्फीति बनी रहेगी और ब्याज दरों में वृद्धि होगी, तो आपको इक्विटी से थोड़ा दूर रहना चाहिए. करीब एक साल में मैच्योर होने वाले गोल्ड और शॉर्ट टर्म बॉन्ड में पैसा लगाया जा सकता है.”

आनंद राठी वेल्थ के डिप्टी सीईओ फ़िरोज़ अज़ीज़ ने इस बारे में सलाह दी है कि मुद्रास्फीति को मात देने वाले रिटर्न पाने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और मध्यम अवधि की सरकारी प्रतिभूतियों के कॉम्बीनेशन में निवेश करना सही रहेगा.

उन्होंने कहा, “निवेशकों के लिए सोना पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा है. यह मुद्रास्फीति और मुद्रा के मूल्यह्रास के खिलाफ एक प्रभावी बचाव है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड मैच्योरिटी पर रखे जाने पर कर-मुक्त रिटर्न के साथ-साथ सोने की कीमतों के जोखिम के अलावा 2.5 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करता है. इसलिए यह सोने में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका है.”

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महंगाई ने उड़ा दिया सोने का रंग! अब निवेशकों को क्या करना चाहिए? समझिए असली कहानी

क्या अब सोने की रंगत उड़ चुकी है? ऐसे में निवेशकों को क्या करना चाहिए?

क्या अब सोने की रंगत उड़ चुकी है? ऐसे में निवेशकों को क्या करना चाहिए?

ग्लोबल मार्केट्स गिरने के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी नहीं आई. सोना भी बाजारों के साथ गिरता ही रहा. आमतौर पर ऐसा नही . अधिक पढ़ें

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  • Last Updated : September 07, 2022, 14:07 IST

हाइलाइट्स

कुछ विशेषज्ञों को आर्थिक मंदी की संभावनाएं नजर आती हैं.
कुछ का कहना है कि कोविड से पार करके आगे उज्ज्वल भविष्य है.
ऐसे में निवेशकों को अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए निवेश करना चाहिए.

निखिल वालवलकर, नई दिल्ली. 2022 आम वर्षों की तरह नहीं है. रूस-यूक्रेन संकट के चलते इस वर्ष दुनियाभर में महंगाई चरम पर पहुंची तो शेयर बाजार भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. महंगाई पर काबू पाने के लिए दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की. इतिहास पर नजर डालें तो, जब-जब ऐसे हालात बने हैं, तब-तब सोना (Gold) एक सेफ हेवन (निवेश का सुरक्षित विकल्प) बना है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.

इस बार हमने देखा कि ग्लोबल मार्केट्स गिरने के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी नहीं आई. सोना भी बाजारों के साथ गिरता ही रहा. ये स्थिति चूंकि कुछ अलग है तो निवेशक इस बात को लेकर घबराए हुए हैं. तो क्या अब ये समझा जा सकता है कि गोल्ड अब एक सेफ हेवन नहीं (Safe haven) है?

सोने ने खुद को साबित किया!
हाल ही में सोने ने खुद को प्रूव भी किया है कि लोग उसे सेफ हेवन क्यों कहते हैं. मार्च-अगस्त 2020 के बीच में सोने की कीमत 1,471 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 2,063 डॉलर पहुंच गई थी. यह वो समय था, जब दुनियाभर के बाजारों पर कोरोना का कहर बरप रहा था. इसी साल फरवरी से मार्च के बीच जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया, तब हमने इसे 1,797 डॉलर से बढ़कर 2,050 डॉलर तक जाते देखा.

1980 में इसकी कीमत 711 डॉलर के रिकॉर्ड पर पहुंची और फिर लम्बे समय तक गिरावट देखी गई. इसके बाद 2006 में सोने की कीमतों ने एक बार फिर नया हाई बनाया. सोने का वोलाटाइल बिहेवियर ऐसा है कि निवेशकों द्वारा इसके बारे में ठीक-ठीक अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल हो गया है. परंतु एक बात तो तय है कि यह निवेशकों एक सुरक्षित हेवेन एसेट क्या है? के पेशेंस को जरूर परखता है.

शेयर बाजार के साथ कम ही चलता है सोना!
सोना और शेयर बाजार को अधिकतर बार एक-दूसरे के उलट चलते ही देखा गया है. बहुत कम बार ऐसा हुए है कि दोनों एसेट एक ही दिशा में चले हों. उदाहरण के लिए, 2017 में जब निफ्टी 50 और S&P 500 इंडेक्सों ने 29 फीसदी और 22 फीसदी का रिटर्न दिया था, उसी दौरान गोल्ड ने भी 6 फीसदी रिटर्न दिया.

इसी तरह, 2018 में S&P 500 ने 4 फीसदी की गिरावट दिखाई और निफ्टी लगभग 3 फीसदी चढ़ा, तब गोल्ड ने 8 फीसदी रिटर्न दिया. 2022 की ही बात करें तो 31 जुलाई तक निफ्टी 50 और S&P 500 ने 9 और 8 फीसदी की गिरावट दिखाई तो गोल्ड केवल 1 फीसदी की बढ़ पाया है. शॉर्ट टर्म बॉन्ड्स में भी लगभग 2 फीसदी की गिरावट आई है, क्योंकि आरबीआई ने ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है.

बेसिक पर लौटना होगा!
इन दिनों हमें एकतरफा विचार सुन रहे हैं. कुछ लोग महंगाई और मंदी को लेकर चिंतित नजर आते हैं तो कुछ को बहुत उज्ज्वल भविष्य नजर आता है, क्योंकि हमने कोविड को पीछे छोड़ दिया है. इनके पीछे अलग-अलग तर्क हैं, लेकिन हमें बेसिक्स को भूलना नहीं चाहिए.

ट्रस्ट म्यूचुअल फंड के संदीप बागला ने कहा, “हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि आर्थिक मंदी की संभावनाएं है, लेकिन इसका कोई स्पष्ट प्रमाण दिखता नहीं. वेजेज और गैस प्राइस ऊपर जा रहे हैं और लेबर मार्केट में कोई पुअर सेंटीमेंट भी नहीं दिखते हैं.” इसके बाद उन्होंने कहा, “महंगाई के बावजूद गोल्ड का प्राइस डॉलर्स में गिरा है, क्योंकि डॉलर मजबूत हुआ है. ब्याज दरों में इजाफा एकदम से महंगाई को नीचे नहीं ला सकता. इसलिए, अभी के लिए, मार्केट वेट एंड वॉच की स्थिति में है और कुछ समय बाद ही स्थितियां साफ होंगी.”

तो निवेशकों को क्या करना चाहिए?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि निवेशकों को क्या करना चाहिए? तो समझ लीजिए कि यह ऐसा समय है जब आपको शोर-शराबे को नहीं सुनना है और अपने वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना है. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर COVID-19 के सभी दुष्प्रभावों के हटने में कितना समय लगेगा, इस बारे में शायद ही कोई विशेषज्ञ सही साबित हो. यदि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को और बढ़ाया जाता है, तो यह अर्थव्यवस्था में मांग प्रभावित होगी, कॉर्पोरेट आय घटेगी और स्टॉक की कीमतें भी गिरेंगी.

साथ ही, ऊंची ब्याज दरों का प्रभाव तुरंत देखने को नहीं मिलेगा. मुद्रास्फीति को शांत होने में कुछ समय लग सकता है और इससे एसेट्स की कीमतों में और अस्थिरता आ सकती है. इन कारकों पर एक निवेशक का कोई नियंत्रण नहीं होता है, इसलिए अपने वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना सबसे अच्छा है. अपने एसेट एलोकेशन पर टिके रहने और डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में निवेश करने से मदद मिलनी चाहिए.
बागला ने कहा, “यदि आप समझते हैं कि मुद्रास्फीति बनी रहेगी और ब्याज दरों में वृद्धि होगी, तो आपको इक्विटी से थोड़ा दूर रहना चाहिए. करीब एक साल में मैच्योर होने वाले गोल्ड और शॉर्ट टर्म बॉन्ड में पैसा लगाया जा सकता है.”

आनंद राठी वेल्थ के डिप्टी सीईओ फ़िरोज़ अज़ीज़ ने इस बारे में सलाह दी है कि मुद्रास्फीति को मात देने वाले रिटर्न पाने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और मध्यम अवधि की सरकारी प्रतिभूतियों के कॉम्बीनेशन में निवेश करना सही रहेगा.

उन्होंने कहा, “निवेशकों के लिए सोना पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा है. यह मुद्रास्फीति और मुद्रा के मूल्यह्रास के खिलाफ एक प्रभावी बचाव है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड मैच्योरिटी पर रखे जाने पर कर-मुक्त रिटर्न के साथ-साथ सोने की कीमतों के जोखिम के अलावा 2.5 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करता है. इसलिए यह सोने में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका है.”

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बॉलीवुड में कैसे शूट होते हैं इंटिमेट सीन? जानकर होगी हैरानी

aajtak.in

एक्ट्रेस तापसी पन्नू की फिल्म हसीन दिलरुबा चर्चा में बनी हुई है. फिल्म में तापसी विक्रांत मैसी और हर्षवर्धन के साथ इंटिमेट सीन्स करती भी दिखी हैं. हाल ही में तापसी ने बताया कि हर्षवर्धन और तापसी इंटिमेट सीन्स को लेकर डरे हुए थे.

तापसी

इस बारे में तापसी ने कहा- मुझे उम्मीद है कि मैंने उन्हें सहज कर दिया होगा क्योंकि शूटिंग के दौरान वे बहुत सहमे हुए नजर आ रहे थे. वे जरूर सोच रहे होंगे कि पता नहीं क्या करेगी हमारे साथ. दोनों ही बहुत ज्यादा डरे हुए थे. मुझे नहीं पता कि आखिर मेरी क्या इमेज बनी हैं इनके जेहन में या फिर क्या दिक्कत है.

फिल्म सीन

आज के समय में इंडियन फिल्म इंडस्ट्री इंटिमेट सीन्स के मामले में अब वास्तविकता के बेहद करीब पहुंच गया है. मेड इन हेवन, फोर मोर शॉट्स प्लीज और सैक्रेड गेम्स, ऑल्ट बालाजी की कई सीरीज और जिस्म- मर्डर जैसी फिल्मों में ये देखा जा सकता है. फिल्म इंडस्ट्री में सभी इसे ओपनली ले रहे हैं.

फिल्म सीन

ऐसे इंटिमेट सीन्स की शूटिंग के लिए निर्देशक इंटीमेसी स्पेशलिस्टों की सेवाएं लेने और वर्कशॉप करने से लेकर शूटिंग के समय सुरक्षित शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. ताकि कलाकारों को किसी तरह की असहजता महसूस न हो.

फिल्म सीन

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की पहली प्रामाणिक इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर आस्था खन्ना कहती हैं, ‘‘तीन साल पहले पश्चिम तक में भी इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की कोई भूमिका नहीं होती थी.’’ मीटू आंदोलन के आने और हॉलीवुड के अहम अभिनेत्रियों के बड़े खुलासे करने के बाद 2018 में एचबीओ के पहले शो ड्यूस के लिए इंटीमेसी कंसल्टेंट की सेवा ली गई थी.

फिल्म पोस्टर

अब इंटिमेट सीन्स से पहले फिल्म के कलाकारों के साथ वर्कशॉप करना, शूटिंग के लिए कुछ नियम तैयार करना, कलाकारों के लिए सहजता की सीमा का पता लगाना और सुरक्षा वस्त्रों का इंतजाम करना है. इंटिमेट सीन की बड़ी सावधानी से कोरियोग्राफी की जाती है. उन्हें एक ही बार में शूट नहीं किया जाता है.

खन्ना बताती हैं, ''कलाकारों के बीच एक केमिस्ट्री बनाई जाती है और वह तभी बनती है जब कलाकारों के बीच एक-दूसरे के प्रति विश्वास हो.’’

पति संग सनी

वहीं अभिनेत्री, प्रोड्यूसर और इंटीमेसी डिजाइनर नेहा व्यास कहती हैं, ‘‘मैंने महसूस किया कि सेट पर कलाकारों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने के लिए कुछ खास प्रयास नहीं किया जा रहा था. हम (कलाकार) जिस तरह से प्रशिक्षित किए जाते हैं, उसी तरह से व्यवहार करते हैं. हमें एहसास ही नहीं होता कि हमारी सहमति का सम्मान भी होना चाहिए. अब हमारी कोशिश यह होती है कि कलाकार शरीर को कोई वस्तु समझना छोड़कर उसे एक उपकरण के तौर पर समझें.’’

फिल्म सीन

निर्देशक भी अब अतिरिक्त कदम उठा रहे हैं. फिल्म निर्माता अलंकृता श्रीवास्तव और सिनेमाटोग्राफर जय ओझा ने फिल्म मेड इन हीवेन की शूटिंग के दौरान कलाकारों के बीच विश्वास का भाव पैदा करने और बार-बार रीटेक से बचने के बारे में विस्तार से बताया.

टाइगर-अनन्या-तारा

मार्गरीटा विद ए स्ट्रा की शूटिंग से पहले निर्देशक शोनाली बोस ने तय कर लिया था कि उनके कलाकार खुद को सुरक्षित महसूस करें. इसलिए कल्कि और सयानी गुप्ता ने बोस के साथ इंटीमेसी वर्कशॉप की. जिस दिन सयानी गुप्ता को अपनी शर्ट उतारनी थी, उस समय सेट पर कुछ महिलाएं ही थीं. बोस ने भी शर्ट उतार दी और कमर पर एक तौलिया बांधा.

वे कहती हैं, ''अगर आप अकेली ही नग्न हों तो आपको झेंप महसूस होती है. कमरे में निर्देशक जब खुद नग्न हो तो तनाव कम हो जाता है.’’

फिल्म सीन

सेक्स के सीन के बाद बोस ने तुरंत एक सुरक्षित हेवेन एसेट क्या है? कलाकारों को गाउन पहनने के लिए दे दिए. कलाकारों के बीच जब खुलकर बातचीत होती है तो उससे भी हिचक दूर होती है और एक अनुकूल माहौल बन जाता है जिससे दृश्यों में जान आ जाती है.

'गेट ऑफ हेवन' का क्या है यहूदियों संबंध

इन पवित्र किता बों को सिनेगॉग में रखा जाता है। और पवित्र धार्मिक किताबों को खास पूजा के मौके पर ही बाहर निकालने की परंपरा रही है। यह किताबें बाहर तभी निकालीं जाती हैं, जब कम से कम 10 वयस्क यहूदी मतावलंबी लोगों की मौजूदगी भी जरूरी होती है।

दरअसल, सिनेगॉग यहूदी प्रार्थना गृह हैं। यह कमरों से लेकर महलनुमा हॉल तक किसी भी तरह के हो सकते हैं। इनमें प्रमुख धार्मिक वस्तुओं के रूप में 'होली ऑर्क' होता है, जो लकड़ी के कबोर्ड से लेकर अलंकृत पेटी के रूप में हो सकता है। आर्क प्रायः ऊंचे रखे जाते हैं। इनमें नुमाइंदगी करने वाली चीजें रखी जाती हैं।

आर्क उस दीवार पर लगाया जाता है, जो यरुशलम की तरफ होती है। यह भारी मखमल पर कढ़ाई करके बनाए गए आवरण से ढका होता है। सिनेगॉग में आर्क आवरण के कई सेट हो सकते हैं, अमूमन, वीक डेज के लिए सादा, शबात और अन्य त्योहारों के लिए सजावटी तौर पर उपयोग में लाया जाता है।

इनमें सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक सामान है, 'तोरा स्क्रॉल, द पेंटाटक,' जो यहूदी लोगों का इतिहास बयां करता है और मोनोथेइज्म (अद्वैतवाद) व जातीय व्यवहार का सार्वभौमिक संदेश देता है। यह आर्क में लोक-वाचन के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यह स्क्रॉल असल में कई चर्मपत्रों को सिलकर बनाया गया होता है, जिसकी ऊंचाई 80 सेंटीमीटर तक हो सकती है।

तोरा स्क्रॉल को पूरा आदर और सम्मान दिया जाता है, हालांकि इसकी पूजा नहीं की जाती। कुछ सिनेगॉग में एक अलग आर्क होता है, जिनमें बाइबल बुक्स के स्क्रॉल होते हैं। इनमें से हैटरॉट का सबैत और अन्य त्योहारों पर पूरक पाठन होता है। तोरा के अलावा सबसे आम तौर पर पाया जाना वाला स्क्रॉल इस्टर है, जो पुरिम का महत्व बयां करता है।

घट रही है यहूदियों की संख्या

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में यहूदियों की संख्या 5 हजार से भी कम होने का अनुमान है। देश की आर्थिक राजधानी के रूप में मशहूर मुंबई में करीब 4 हजार यहूदियों में से करीब 1800 लोग ठाणे इलाके में ही रहते हैं।

3 तरह का यहूदी समुदाय

भारत में यहूदी समुदाय के आम तौर पर तीन बड़े संप्रदाय हैं। इनमें पहला संप्रदाय बेन इजरायल है जिसकी महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा तादाद है। यहूदियों के दूसरे संप्रदाय को बगदादी यहूदी के नाम से जाना जाता है। और यहूदियों का तीसरा संप्रदाय कोचिन यहूदी है जिसके लोग ज्यादातर मालाबार तट के आसपास रहते हैं।

कोलकाता और कोच्चि में रहने वाले यहूदियों की संख्या बहुत कम होती जा रही है । वर्ष 1796 में सैमुअल स्ट्रीट पर बना 'गेट ऑफ मर्सी' सिनेगॉग मुंबई का सबसे पुराना यहूदी पूजास्थल है।

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