Investment Tips : क्‍या है लिक्विड ईटीएफ और कैसे कर सकते हैं इसमें निवेश, कितना मिलेगा फायदा?

लिक्विड फंड में निवेशक जब चाहें अपनी राशि निकाल सकते हैं.

लिक्विड फंड में निवेशक जब चाहें अपनी राशि निकाल सकते हैं.

निवेशकों के सामने ETF में निवेश करने के क्या फ़ायदे हैं कई बार ऐसी स्थिति आती है जब उन्‍हें मोटी रकम अपने बचत खाते में रखनी पड़ती है. चूंकि, अधिकतर बैंक बचत . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : October 12, 2022, 09:05 IST

हाइलाइट्स

इक्विटी बेचने पर आपको रकम का भुगतान T+2 (कारोबारी और दो दिन) पर होता है.
परेशानियों से बचने के लिए निवेशकों को लिक्विड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में पैसे लगाना चाहिए.
निप्पॉन इंडिया ईटीएफ के ल‌िक्विड बीईएस का खर्च 0.69 फीसदी पड़ता है.

नई दिल्‍ली. भारत में बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक अपनी व्यापारिक पूंजी या इमरजेंसी फंड को बचत बैंक खाते में जमा करते हैं. इस खाते पर बेहद कम ब्‍याज मिलता है, जिससे वे अतिरिक्त कमाई नहीं कर पाते हैं. ऐसे में लिक्विड फंड या लिक्विड ईटीएफ काफी कारगर साबित हो सकता है.

दरअसल, इक्विटी बेचने पर आपको रकम का भुगतान T+2 (कारोबारी और दो दिन) पर होता है. यहां पैसे लगाना जोखिम वाला काम भी हो सकता है. इन सभी जोखिमों और परेशानियों से बचने के लिए निवेशकों को लिक्विड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में पैसे लगाना चाहिए. यहां बिक्री से मिली आय का निवेश कर सकते हैं और अधिक जोखिम उठाए बिना ऐसी व्यापारिक पूंजी पर रिटर्न के अतिरिक्त लाभ का आनंद ले सकते हैं. फिर से निवेश करने के लिए लिक्विड ईटीएफ कम जोखिम और उच्च स्तर की तरलता के साथ बेहतर रिटर्न भी दे सकते हैं.

कैसे करें इसमें निवेश
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बेहद कम पूंजी के साथ लिक्विड ईटीएफ में निवेश का मौका देता है. आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल अर्जित लाभांश को निवेशकों के बैंक खाते में जमा करता है और इसके प्रबंधन के लिए कुल राशि का महज 0.25% शुल्‍क चार्ज करता है. अगर दूसरे विकल्‍पों को देखें तो डीएसपी निफ्टी के लिक्विड ईटीएफ की दर 0.64 फीसदी है जबकि निप्पॉन इंडिया ईटीएफ के ल‌िक्विड बीईएस का खर्च 0.69 फीसदी पड़ता है.

एक्‍सपर्ट की सलाह मानें तो खुदरा निवेशकों के लिए इक्विटी शेयरों की बिक्री के समय ब्रोकर को समान राशि का निवेश करने के लिए कहना चाहिए और इसी आधार पर लिक्विड ईटीएफ की यूनिट खरीदना समझदारी है. जब कुछ इक्विटी शेयर खरीदना चाहते हैं, तो किसी ब्रोकर से लिक्विड ईटीएफ का उपयोग करके खरीदारी करने के लिए कह सकता है जिसे मार्जिन मनी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

रिटर्न पर जोखिम बेहद कम
लिक्विड ईटीएफ से मिला रिटर्न अपेक्षाकृत अधिक स्थिर होते हैं, क्योंकि इस तरह की शॉर्ट-टर्म डेट सिक्योरिटीज में लंबी अवधि की तुलना में उतार-चढ़ाव की संभावना कम होती है. इसके अलावा निवेशक अपनी जरूरत पर कभी भी हाजिर बाजार में इस यूनिट को बेच सकता है. लिक्विड ईटीएफ की खरीद या बिक्री पर कोई सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) लागू नहीं होता है. लिहाजा आप अपने पैसे को बेहद कम समय के लिए किसी विकल्‍प में रखना चाहते हैं, जहां रिटर्न अच्‍छा मिले और जोखिम भी न हो तो लिक्विड ईटीएफ बेहतर विकल्‍प हो सकता है.

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ईटीएफ के बारे में यहां जानिए अपने हर सवाल का जवाब

इंडेक्‍स फंडों की तरह ईटीएफ अमूमन किसी खास मार्केट इंडेक्स को ट्रैक करते हैं. इनका प्रदर्शन उस इंडेक्‍स जैसा होता है.

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  1. ईटीएफ क्‍या है?
    एक्‍सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ शेयर बाजार में लिस्‍ट और ट्रेड होने वाले फंड हैं. न्यू फंड ऑफर यानी एनएफओ की अवधि के दौरान फंड हाउस से खरीदने के लिए ये उपलब्‍ध होते हैं. एनएफओ के बाद फंड की यूनिटें शेयर बाजार पर लिस्‍ट होती हैं. फिर इन्‍हें वहां से खरीदा और बेचा जा सकता है.
  2. ईटीएफ के कितने प्रकार होते हैं?
    इंडेक्‍स फंडों की तरह ईटीएफ अमूमन किसी खास मार्केट इंडेक्स को ट्रैक करते हैं. इनका प्रदर्शन उस इंडेक्‍स जैसा होता है. यह इंडेक्स निफ्टी ईटीएफ जैसा शेयर मार्केट इंडेक्‍स हो सकता है या गोल्‍ड ईटीएफ जैसा कमोडिटी इंडेक्स या बॉन्‍ड ईटीएफ के तौर पर बॉन्‍ड मार्केट. एसेट मैनेजमेंट कंपनी ईटीएफ लॉन्‍च करती हैं. इन्‍हें किसी अन्‍य म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम की तरह ही पेश किया जाता है.
  3. ईटीएफ में निवेश के लिए क्‍या शर्त है?
    ईटीएफ में निवेश के लिए डीमैट के साथ ट्रेडिंग अकाउंट का होना जरूरी है. कोई व्यक्ति 3-इन-1 अकाउंट खोलने का भी विकल्प चुन सकता है. इसमें बैंक अकाउंट के साथ डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट की सुविधा मिलती है. इस तरह आप ज्यादा कुशलता के साथ एक ही जगह अपने निवेश को मैनेज कर पाते हैं. इस अकाउंट को खोलने के लिए एक फॉर्म भरना पड़ता है. साथ ही केवाईसी दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं.
  4. ईटीएफ में निवेश का क्‍या तरीका है?
    कारोबारी घंटों के दौरान ईटीएफ की मनचाही यूनिटें खरीदकर निवेश किया जा सकता है. निवेशक अपने ब्रोकर को निवेश का इंस्‍ट्रक्‍शन दे सकते हैं या ब्रोकर की ओर से उपलब्‍ध कराए जाने वाले ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का इस्‍तेमाल कर निवेश कर सकते हैं.
  5. ईटीएफ कैसे काम करते हैं?
    जिस तरह दूध के दाम बढ़ जाने से पनीर और घी महंगे हो जाते हैं. ठीक वैसे ETF में निवेश करने के क्या फ़ायदे हैं ही ईटीएफ में भी इंडेक्स के चढ़ने-उतरने का असर होता है. यानी ईटीएफ का रिटर्न और रिस्क बीएसई सेंसेक्स जैसे इंडेक्स या सोने जैसे एसेट में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है.
  6. ईटीएफ का रिटर्न कैसा होता है?
    ईटीएफ के पोर्टफोलियो में तमाम तरह की प्रतिभूतियां होती हैं. इनका रिटर्न इंडेक्स जैसा होता है.
  7. ईटीएफ में कैसे होती है खरीद-बिक्री?
    ईटीएफ की पेशकश पहले एनएफओ के रूप में होती है. फिर ये शेयर बाजार में लिस्ट होते हैं. एनएफओ किसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी की नई स्कीम होती है. इसके जरिये कोई म्यूचुअल फंड कंपनी शेयरों, सरकारी बॉन्ड जैसे इंस्ट्रूमेंट में निवेश करने के लिए निवेशकों से पैसे जुटाती है. ट्रेडिंग पोर्टल या स्टॉक ब्रोकर के जरिये शेयर बाजार पर ईटीएफ की खरीद-फरोख्त होती है.

- दिन में खरीदे गए ईटीएफ के मूल्‍य और दिन के समाप्‍त होने पर ईटीएफ की एनएवी में अंतर हो सकता है. इसका कैलकुलेशन ईटीएफ में शामिल प्रतिभूतियों के बंद भाव के आधार पर होता है.

इस पेज की सामग्री सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग (सीआईईएल) के सौजन्य से. गिरिजा गादरे, आरती भार्गव और लब्धि मेहता का योगदान.

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ETF में निवेश करने के क्या फ़ायदे हैं

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आप भी कर सकते हैं ईटीएफ में निवेश, ये हैं फायदे

ईटीएफ को खरीदना और बेचना अपेक्षाकृत आसान है. इसकी वजह यह है कि इसकी ट्रेडिंग शेयर बाजार में होती है

आप भी कर सकते हैं ईटीएफ में निवेश, ये हैं फायदे

कैसे करता है काम?
ईटीएफ किसी इंडेक्स या एसेट को ट्रैक करता है. मान लीजिए कि कोई ईटीएफ बीएसई सेंसेक्स को ट्रैक करता है. ऐसे में यह ईटीएफ अपने फंड का निवेश सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों के शेयरों में करेगा. यह निवेश उसी अनुपात में होगा, जितना हर कंपनी का सेंसेक्स में वेटेज होगा. आपके इस ईटीएफ में निवेश करने पर एसेट मैनेजमेंट कंपनी आपको निवेश के मूल्य के हिसाब से यूनिट्स जारी कर देगी.

खरीदना और बेचना आसान
ईटीएफ की एक बड़ी खूबी यह है कि इसे खरीदना और बेचना अपेक्षाकृत आसान है. इसकी वजह यह है कि इसकी ट्रेडिंग शेयर बाजार में होती है. इसमें निवेश के लिए आपको म्यूचुअल फंड के डिस्ट्रिब्यूटर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती. म्यूचुअल फंड की आम स्कीमों में अपनी यूनिट्स बेचने के लिए भी आपको म्यूचुअल फंड कंपनी के पास जाना पड़ता है. सीएफपी जितेंद्र पी एस सोलंकी कहते हैं कि शेयर बाजार में खरीद-फरीख्त होने से इसकी कीमत रियल टाइम होती हैं. यह इसकी बड़ी खासियत है. यह बात म्यूचुअल फंड स्कीम में नहीं है.

छोटी रकम से भी निवेश
ईटीएफ में आप छोटी रकम से भी निवेश कर सकते हैं. अगर कोई निवेशक निफ्टी में शामिल कंपनियों में निवेश करना चाहता है तो उसे इन 50 शेयरों में निवेश करना पड़ेगा. इसके लिए काफी पैसे की जरूरत होगी. अगर आप किसी ऐसे ईटीएफ में निवेश करना चाहते हैं, जिसका अंडरलाइंग निफ्टी 50 इंडेक्स है तो आप थोड़े पैसे से भी इस ईटीएफ की यूनिट्स खरीद सकते हैं. इससे आपको निफ्टी50 में शामिल कंपनियों के रिटर्न का फायदा उठाने का मौका मिलेगा.

कम एक्सपेंस रेशियो
ईटीएफ में एक्सपेंस रेशियो भी म्यूचुअल फंड की स्कीमों के मुकाबले कम होता है. इसमें एक्सपेंस रेशियो 0.5 से 1 फीसदी के बीच होता है. इसके मुकाबले म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों का एक्सपेंस रेशियो 2.5 फीसदी तक हो सकता है. मधुपम कृष्णा का कहना है कि इसकी दूसरी खासियत यह है कि इसमें म्यूचुअल फंड्स स्कीम की तरह आपको एग्जिट लोड भी नहीं देना पड़ता. इन खासियतों की वजह से पिछले कुछ सालों में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. अब छोटे शहरों में भी निवेशक ईटीएफ में पैसा लगा रहे हैं.

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