– आर्थिक अपराधों पर लगाम लगेगी। सीबीडीसी लेनदेन में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।

डिजिटल मुद्रा को अभी तय करना है लंबा सफर: सुभाष चंद्र गर्ग

नयी दिल्ली, चार दिसंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने बहुत सीमित उपयोग के लिये प्रायोगिक आधार पर सरल डिजिटल रुपये की शुरुआत की है और सही मायने में बलॉकचेन आधारित डिजिटल मुद्रा के उलट यह पारंपरिक बैंक खाते की ही तरह है, जिसमें लेन-देन को लेकर रुपये के स्थान पर डिजिटल टोकन का उपयोग किया जाएगा। वास्तव में केंद्रीय बैंक को पूर्ण डिजिटल मुद्रा को लेकर अभी लंबा रास्ता तय करना है। भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है आरबीआई के प्रायोगिक तौर पर खुदरा डिजिटल रुपया भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है शुरू किये जाने के साथ पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने यह बात कही है।

उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था में भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है मुद्रा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है लेकिन यह विकास का कोई प्राथमिक कारक नहीं है। डिजिटल व्यवस्था में सहज लोगों के लिये यह अच्छा है, लेकिन नकदी पर भरोसा करने वाले आम आदमी के लिये यह बहुत मायने नहीं रखता है।

क्या आज डिजिटल रुपये की आवश्यकता है?

पि छले दिनों की आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीबीडीसी (सेन्ट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) को अभी एक पायलट प्रोजेक्ट की तरह देखा जा रहा है और इस साल के अंत तक होलसेल व्यापारों के लिए यह उपलब्ध होगा। इससे पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने 2022- 23 के बजट में बताया था कि केंद्रीय बैंक इस साल के अंत तक सीबीडीसी लाएगा।

आरबीआई के अनुसार, “सीबीडीसी डिजिटल रूप में केंद्रीय बैंक द्वारा जारी एक कानूनी टेंडर है। यह फ़िएट मुद्रा के समान है और फ़िएट मुद्रा के साथ एक दूसरे से एक्सचेंज किया जा सकेगा।” ब्लॉकचेन द्वारा समर्थित वॉलेट का प्रयोग करके डिजिटल फिएट मुद्रा या सीबीडीसी का लेन-देन किया जा सकता है। जबकि सीबीडीसी का कॉन्सेप्ट सीधे तौर पर देखा जाए तो बिटकॉइन से प्रेरित है यह विकेंद्रीकृत (डिसेंट्रलाइज्ड) आभासी(वर्चुअल) मुद्राओं और क्रिप्टो संपत्तियों से अलग है। क्रिप्टो करेंसी राज्य द्वारा नहीं जारी की जाती है और इसमें लीगल टेंडर का अभाव भी देखा जा भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है सकता है।

डिजिटल मुद्रा: आज से भारत में डिजिटल मुद्रा 100 से अधिक देशों में मौजूद

नई दिल्ली: अब न तो अपनी जेब में कैश लेकर चलने की जरूरत होगी और न ही किसी थर्ड पार्टी एप के जरिए ऑनलाइन पेमेंट करने की बाध्यता होगी. भारत का खुदरा डिजिटल रुपया आज लॉन्च होने जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने का ऐलान किया है। आपको बता दें कि इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 नवंबर से प्रायोगिक आधार पर देश में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) लॉन्च की है। सिर्फ भारत ही नहीं, CBDC वर्तमान में दुनिया के लगभग आधे देशों में काम कर रहा है। आइए जानते हैं क्या है ये करेंसी, कैसे काम करती है और किस देश ने इस इनोवेशन में इतनी तरक्की की है…

सेंट्रल बैंक डिजिटल भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है करेंसी क्या है?

भास्कर एक्सप्लेनर: कैसा होगा RBI का 'डिजिटल रुपया', क्या ये लेगा भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी की जगह? जानिए सब कुछ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2022 में डिजिटल रुपया लॉन्च करने की घोषणा की भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है है। यह सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी, यानी CBDC होगी। RBI इस डिजिटल करेंसी को नए वित्त वर्ष की शुरुआत में लॉन्च करेगा। डिजिटल रुपया, या CBDC को डिजिटल इकोनॉमी के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही भारत इस तरह से आधिकारिक तरीके भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है से अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च करने वाला पहला बड़ा देश बन जाएगा।

ऐसे में आइए जानते भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है हैं कि CBDC क्या है? सरकार को इसकी जरूरत क्यों पड़ी? आम लोगों के लिए भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है यह कितना सुरक्षित और फायदेमंद होगा?

सवाल : डिजिटल करेंसी CBDC को कौन लॉन्च करेगा?

भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है

डिजिटल मुद्रा से आरबीआई की कैश मैनेजमेंट की लागत होगी कम

नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। आरबीआई ने 1 नवंबर से होलसेल सेगमेंट में डिजिटल रुपया लॉन्च करने के लिए एक पायलट भौतिक मुद्रा डिजिटल हो जाती है परियोजना शुरू की है और बाद में एक महीने के भीतर रिटेल सेगमेंट में एक और प्रोजेक्ट लाने की योजना है। केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) को अपनाने के पीछे कई कारण हैं, जैसे वित्तीय समावेशन को बढ़ाना और कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना।

डिजिटल मुद्रा से आरबीआई की कैश मैनेजमेंट की लागत होगी कम

नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। आरबीआई ने 1 नवंबर से होलसेल सेगमेंट में डिजिटल रुपया लॉन्च करने के लिए एक पायलट परियोजना शुरू की है और बाद में एक महीने के भीतर रिटेल सेगमेंट में एक और प्रोजेक्ट लाने की योजना है। केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) को अपनाने के पीछे कई कारण हैं, जैसे वित्तीय समावेशन को बढ़ाना और कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना।

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