1991 से पहले भारत सरकार ने वि‍देश व्‍यापार और भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ वि‍देशी नि‍वेशों पर प्रति‍बंधों के माध्‍यम से वैश्‍वि‍क प्रति‍योगि‍ता से अपने उद्योगों को संरक्षण देने की एक नीति‍ अपनाई थी ।

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था

भारत जीडीपी के संदर्भ में वि‍श्‍व की नवीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है । यह अपने भौगोलि‍क आकार के संदर्भ में वि‍श्‍व में सातवां सबसे बड़ा देश है और जनसंख्‍या की दृष्‍टि‍ से दूसरा सबसे बड़ा देश है । हाल के वर्षों में भारत गरीबी और बेरोजगारी से संबंधि‍त मुद्दों के बावजूद वि‍श्‍व में सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक के रूप में उभरा है । महत्‍वपूर्ण समावेशी विकास प्राप्‍त करने की दृष्‍टि‍ से भारत सरकार द्वारा कई गरीबी उन्‍मूलन और रोजगार उत्‍पन्‍न करने वाले कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ।

इति‍हास

ऐति‍हासि‍क रूप से भारत एक बहुत वि‍कसि‍त आर्थिक व्‍यवस्‍था थी जि‍सके वि‍श्‍व के अन्‍य भागों के साथ मजबूत व्‍यापारि‍क संबंध थे । औपनि‍वेशि‍क युग ( 1773-1947 ) के दौरान ब्रि‍टि‍श भारत से सस्‍ती दरों पर कच्‍ची सामग्री खरीदा करते थे और तैयार भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ माल भारतीय बाजारों में सामान्‍य मूल्‍य से कहीं अधि‍क उच्‍चतर कीमत पर बेचा जाता था जि‍सके परि‍णामस्‍वरूप स्रोतों का द्धि‍मार्गी ह्रास होता था । इस अवधि‍ के दौरान वि‍श्‍व की आय में भारत का हि‍स्‍सा 1700 ए डी के 22.3 भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रति‍शत से गि‍रकर 1952 में 3.8 प्रति‍शत रह गया । 1947 में भारत के स्‍वतंत्रता प्राप्‍ति‍ के पश्‍चात अर्थव्‍यवस्‍था की पुननि‍र्माण प्रक्रि‍या प्रारंभ हुई । इस उद्देश्‍य से वि‍भि‍न्‍न नीति‍यॉं और योजनाऍं बनाई गयीं और पंचवर्षीय योजनाओं के माध्‍यम से भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ कार्यान्‍वि‍त की गयी ।

व्यापारिक उद्देश्यों के लिए सबसे पहले कौन भारत आया था?

Key Points

  • पुर्तगाली खोजकर्ता वास्को डी गामा भारत में कालीकट में अटलांटिक महासागर के माध्यम से भारत पहुंचने वाला पहला यूरोपीय था।
  • पुर्तगालियों को डच द्वारा पीछा किया गया था जब उन्होंने 16वीं शताब्दी के मध्य में भारतीय बाजार में प्रवेश करने की कोशिश की थी।
  • ब्रिटिश और फ्रांसीसी बहुत बाद में आए।
  • फ्रांसिस्को डी अल्मीडा भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ को भारत में पहला पुर्तगाली गवर्नर नियुक्त किया गया था।
  • पुर्तगालियों ने अपना पहला किला कोचीन में बनाया।

भारत के साथ व्यापार सौदा इस साल ब्रिटेन की सबसे बड़ी बातचीत, अरबों रुपये के व्यापार का खुलेगा रास्ता

Nishant kumar

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को इंग्लैंड की वाणिज्य मंत्री एनी-मेरी ट्रेवेलियन से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लॉन्च होने से पहले इन दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। पीयूष गोयल ने इस मुलाकात के बारे में एक ट्वीट में जानकारी दी। गोयल ने बताया कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट शुरू होने से भारत और ब्रिटेन दोनों को बिजनेस और ट्रेड में फायदा होगा। इस एग्रीमेंट के जरिये दोनों देश अपने-अपने कारोबारी कानून को आसान बनाएंगे और कस्टम ड्यूटी घटाएंगे। दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने और माल और सेवा के कारोबार बढ़ाने के लिए यह एग्रीमेंट हो रहा है।

Explainer: रूस-यूक्रेन युद्ध से इन व्यापारियों को फायदा, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक है भारत

Representative Image (Photo: Reuters)

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gnttv.com

  • नई दिल्ली ,
  • 09 मार्च 2022,
  • (Updated 09 मार्च 2022, 12:22 PM IST)

रूस-यूक्रेन के युद्ध के कारण गेहूं की सप्लाई पर पड़ा असर

रूस और यूक्रेन के युद्ध का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है. दोनों देशों के बीच के तनाव के कारण अन्य देशों में महंगाई बढ़ रही है. रूस से कच्चे तेल का निर्यात बंद है और ऐसे में, सभी देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ना तय हैं.

इसके अलावा अन्य जरुरी उत्पाद जैसे गेहूं की आपूर्ति पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है. बताया जा रहा है कि रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद काला सागर के रास्ते आने वाला गेहूं सप्लाई रूट काफी प्रभावित हुआ है. जिस कारण विदेशों में बहुत से खरीददार काला सागर के रास्ते आने वाले गेहूं का विकल्प खोज रहे भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं.

रूस और यूक्रेन में गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है और दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का 30 फीसदी इन्हीं दोनों देशों से आता है. अब स्थिति बदल चुकी है और दुनिया की निगाहें गेहूं के निर्यात के लिए भारत पर टिकी हैं क्योंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है.

अर्थ जगत में बजा भारत का डंका, मुक्त व्यापार समझौते के लिए ब्रिटेन भी तैयार

भारत के लिए अर्थ जगत के मोर्चे से एक और बड़ी खबर आई है। दरअसल, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भारत और ब्रिटेन भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रतिबद्धता दोहराई है। इस समझौते से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को और आगे भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ बढ़ने में काफी मदद मिलेगी।

FTA को लेकर क्या बोले ब्रिटिश पीएम ?

ज्ञात हो, इस संबंध में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा है कि हिंद प्रशांत क्षेत्र के साथ संबंधों को बढ़ाने के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। ब्रिटिश पीएम ने आगे कहा भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ कि भारत के साथ यह समझौता करने पर ब्रिटेन विचार कर रहा है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने पिछले महीने 10 डाउनिंग स्ट्रीट भारतीय व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ में पदभार ग्रहण करने के बाद विदेश नीति पर दिए पहले भाषण में इसका जिक्र किया। उन्होंने सोमवार रात, 28 नवंबर 2022 को लंदन के लॉर्ड मेयर के औपचारिक भोज में यह भाषण दिया।

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में ”स्वतंत्रता और खुलेपन” के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटेन प्रतिबद्ध है। गौरतलब हो, पिछले महीने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनका प्रमुख विदेश नीति के संबंध में पहला भाषण था।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच भी हाल ही में हुआ FTA

ज्ञात हो, हाल ही में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच भी मुक्त व्यापार समझौते को मंजूरी मिल चुकी है। बीते एक दशक में ये पहली बार था कि जब भारत ने किसी विकसित देश के साथ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता किया। बता दें ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच हुए समझौते के आधार पर दोनों देशों के बीच 100 फीसदी टैरिफ लाइन खोलने का फैसला किया गया था। अब इसी क्रम में ब्रिटेन और भारत के बीच भी जल्द ही बड़ा समझौता होने के आसार नजर आ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि वैश्विक कारोबार को लेकर भारत का नजरिया अब बदल चुका है। भारत लगातार द्विपक्षीय कारोबार के संबंधों पर ज्यादा जोर दे रहा है। यूएई के साथ ऐतिहासिक समझौते के बाद ऑस्ट्रेलिया से करार और अब इसी कतार में खड़े ब्रिटेन के मुक्त व्यापार समझौते के इशारे से साफ है कि भारत का कारोबारी जगत आगामी दिनों में और अधिक बेहतर ग्रोथ हासिल करने वाला है।

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