Ego यानी अहंकार इसके बारे में आप सभी तो जानते होंगे इसने बहुत से लोगो को बर्बाद किया है आप सभी तो रावण को जानते है जो की बहुत बुद्धिमान था तीनो लोको में उसके जैसा पंडित कोई नहीं था लेकिन उसको भी अपने ऊपर अहंकार हो जाता है उसके बाद उसका सर्वनाश हो जाता, … Read more

fibonacci Retracement

Stop Loss क्या होता है – स्टॉप लोस क्या है – Share पर स्टॉप लोस कि पूरी जानकारी

शेयर मार्किट में जब हम ट्रेडिंग करते है तो Stop Loss हमारे लिए सबसे ज्यादा कीमती चीज़ होती है . स्टॉप लोस का उपयोग सबसे ज्यादा ट्रेडर्स करते है .

वो लोग जो Intraday Trading करते है या अन्य प्रकार कि ट्रेडिंग करते है उनके लिए स्टॉप लोस बहुत जरुरी है .

स्टॉप लोस को समझने के लिए आपको ट्रेडिंग के बारे में पूरी जानकारी होना चाहिए. बिना ट्रेडिंग कि जानकारी के आप stop loss को ठीक से नहीं समझ पाएँगे .

तो अगर आप ट्रेडिंग के बारे में जानना चाहते है कि ट्रेडिंग क्या है या ट्रेडिंग कैसे करते है एवं इंट्राडे या डे ट्रेडिंग कैसे करे तो हमारी नीचे दी गई पोस्ट को पढ़े .

अगर आप ट्रेडिंग और इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में जान गए है तो चलिए अब जानते है Stop Loss शब्द के बारे में कि stop loss का मतलब क्या है.

ट्रेडिंग में stop loss एक ऐसा विकल्प होता है जिसकी मदद से आप एक कीमत को तय करते है जहाँ पर जाकर आपका नुकसान रुक जाये .

उदाहरण के लिए मान लेते है कि आपने 125 रूपए प्रति शेयर कि कीमत से शेयर ख़रीदे और आपको लगता है कि जिस कंपनी के शेयर अपने ख़रीदे है उनकी कीमत बढ़ेगी .

कीमत बढ़ कर 140 रूपए प्रति शेयर तक जाएगी. लेकिन तभी Share कि Price घटना शुरू हो गई और गिरते-गिरते शेयर कि कीमत 100 रूपए प्रति शेयर हो गई .

अब आपको पता चला कि इस कंपनी के शेयर कि कीमत आज बढ़ने कि जगह और घटेगी, ऐसी इस्थिती में अपने सोचा कि चलो अब शेयर को 100 रूपए प्रति शेयर कि कीमत पर बैच देते है ताकि ज्यादा नुकसान न हो .

लेकिन जब तक आप शेयर को बेचने के लिए तैयार हुए तब तक शेयर कि कीमत और घट गई और अब शेयर कि कीमत घट कर 90 रूपए प्रति शेयर हो गई .

अब ऐसी इस्थिती में आपको 35 रूपए प्रति शेयर का नुकसान हो गया.

Stop Loss लगाने से क्या स्टॉप लॉस कहां होना चाहिए? होगा

उदाहरण के लिए अपने जो शेयर 125 रूपए प्रति शेयर कि कीमत पर ख़रीदे है उनपर आप ने 100 रूपए प्रति शेयर कि कीमत पर Stop Loss लगा दिया.

अब मान लेते है कि उस शेयर कि कीमत गिरना शुरू हो गई और गिरते-गिरते 100 रूपए प्रति शेयर पर पहुच गई . तो आपके ट्रेडिंग अकाउंट से शेयर तुरंत 100 रूपए प्रति शेयर कि कीमत पर बिक जायेंगे . इस तरह आपको केवल 25 रूपए प्रति शेयर का नुकसान होगा.

अब आप जान गए है कि स्टॉप लोस क्या होता है एवं स्टॉप लोस क्या है. अगर आप ट्रेडिंग करने के लिए जानना चाहते है कि ट्रेडिंग करते समय stop loss कैसे लगते है तो उसके लिए हमारी नीचे दी गई पोस्ट पढ़े .

अगर आप के मान में Stop Loss Kya Hota Hai से जुड़े कोई सवाल है जो आप पूछना चाहते है तो comment करके पूछ सकता है हम आपको तुरंत जबाब देंगे .

Best stop loss strategy for intraday

ट्रेड प्रोफिट में चल रहा होता हैं. लेकिन प्रॉफिट कहां बुक करना है, ये चीज नहीं पता होने के कारण ट्रेडर अपना लॉस कर लेते हैं. और कई ऐसे भी ट्रेडर का सवाल होता है कि स्टॉप लॉस नहीं लगाया था और एक पॉइंट्स स्टॉक नीचे ही गया था और स्टॉप लॉस लगाने के बारे में सोच ही रहा था की स्टॉक उससे पहले ही नीचे चला गया. ये सब चीजें आपके साथ होती है और अच्छे खासे ट्रेड को आप लॉस में बदल देते हैं.

अगर आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ते हैं, तो स्टॉप लॉस कैसे लगाए, कैसे ट्रेड लेना चाहिए, एक्सपर्ट ट्रेडर कौन सी चीज दिमाग में सोच कर ट्रेड लेते हैं. ऐसा नहीं कि कोई चीज सुनी है तो वही चीज तुरंत पूरी की पूरी कॉपी पेस्ट करनी है. कभी–कभी अपना दिमाग भी लगाना होता है ट्रेड में कुछ भी हो सकता है प्लान A के साथ प्लान B भी होना जरूरी है. हालांकि आपको प्लान B पर तभी जाना है जब प्लान A आपके लिए काम नहीं कर रहा हो.

महत्वपूर्ण पॉइंट

  • जब कैंडल बड़ी बनी हो तो आपको ट्रेड नहीं लेना है. अब आप सोच रहे होंगे कि कितनी बड़ी हो. तो आपको बता दें, यदि कैंडल 1% से बड़ी बनती दिखे. तो आपको को ट्रेड नहीं लेना हैं. आपको ट्रेड में एंट्री तभी लेना हैं जब कैंडल 1% से नीचे हों जैसे 0.5%, 0.8% या फिर 0.9% तक का भी ले सकते हैं.
  • यदि ट्रेड में एंट्री लेने के बाद स्टॉक नीचे जाता है, तो आप यह चेक कर सकते हैं कि 50% fib Retracement पार हुआ है या नहीं। मान लीजिए आपने ट्रेड ले लिया है और हो सकता है कैंडल आपके अनुसार ना move करे और अगली कैंडल Red बन जाए और स्टॉक नीचे जाने लगे. अब आप क्या करेंगे? क्योंकि आपके पास समय भी कम और तुरंत एक्शन भी लेना हैं. आपने स्टॉप लॉस भी लगा दिया है. लेकिन आपको Fibonacci Retracement से भी check करना जरूरी है ये कैसे देखना है नीचे चार्ट में देख सकते हैं.

Target and stop loss for intraday

किसी भी ट्रेड में एंट्री करने से पहले स्टॉप लॉस और टारगेट तय होना चाहिए। जैसे कि ऊपर के पैराग्राफ में आपने देखा कि स्टॉप लॉस और टारगेट कैसे लगाना है तो उसी के हिसाब से किसी भी ट्रेड में एंट्री लेने से पहले stop loss और target तय कर लें. अब प्रोफिट कितना लेना है? ये अलग–अलग ट्रेडर पर निर्भर करता है. आप चाहे स्टॉप लॉस को ट्रेल भी कर सकते हैं जिसे trailing Stop Loss कहा जाता है.

Stoploss and target

स्टॉप लॉस कहां होना चाहिए?

आप स्टॉप-लॉस के लिए यह एरर तब देखेंगे जब ऑर्डर के लिए ट्रिगर और लिमिट प्राइस गलत एंटर किये गए हैं। एक स्टॉप-लॉस ऑर्डर में ट्रिगर प्राइस और लिमिट प्राइस डालना होता है। जब ट्रिगर प्राइस आ जाता है , आपका ऑर्डर लिमिट प्राइस में प्लेस हो जाता है। आप इन स्तिथियों में यह एरर देखेगे :

  • Buy stop-loss orders : यदि स्टॉप-लॉस का ट्रिगर प्राइस लिमिट प्राइस से ज्यादा है।
  • Sell stop-loss orders : यदि स्टॉप-लॉस ट्रिगर प्राइस लिमिट प्राइस से कम है।

यदि ऊपर दिए गए अनुसार ऑर्डर डाले जाते हैं, तो ऑर्डर पेंडिंग ऑर्डर की तरह प्लेस रहेगा और एक्सेक्यूटे नहीं होगा।

उदाहरण के साथ

मान लीजिये कि आप एक स्टॉक होल्ड करते है जो ₹100 में ट्रेड हो रहा है और इसमें आप ₹95 में ट्रिगर प्राइस और ₹96 में लिमिट सेलिंग प्राइस डालते हैं। क्योंकि यह लिमिट ऑर्डर करंट मार्केट प्राइस से ज्यादा है यह पेंडिंग ऑर्डर में बदल जायेगा और एक्सेक्यूटे नहीं होगा। यह ऑर्डर ज्यादातर केसेस में तभी एक्सेक्यूटे होगा जब लिमिट ऑर्डर ₹95 से कम होगा।
ध्यान दीजिये कि जब आप खरीदने का SL ऑर्डर डालते हैं तो ट्रिगर प्राइस लिमिट प्राइस से कम(या बराबर) होना चाहिए और बेचने का SL ऑर्डर डालते समय ट्रिगर प्राइस लिमिट प्राइस से ज्यादा होना चाहिए। देखिये स्टॉप लॉस आर्डर क्या है और इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते है?

क्या आप जानते हैं ? आप स्टॉप-लॉस मार्केट (SL-M) ऑर्डर का उपयोग कर सकते हैं जहां ट्रिगर हिट होने के बाद ऑर्डर मार्केट स्टॉप लॉस कहां होना चाहिए? प्राइस पर प्लेस हो जाता है। इस तरह आपको स्टॉप-लॉस एक्सेक्यूटे नहीं होने के एरर सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, ऑप्शंस के लिए स्टॉप-लॉस मार्केट ऑर्डर नहीं डाले जा सकते है। देखिये स्टॉप लॉस ऑर्डर क्या हैं और उनका उपयोग कैसे करें?

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How to Set Up Stop Loss and Target | स्टॉप लॉस और टारगेट कैसे सेट करें

How-to-Set-Up-Stop-Loss-and-Target

आज इस पोस्ट में आपको सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट बताने जा रहा हूं जिसको लेकर हर कोई ट्रेडर परेशान हैं खासकर वो नए ट्रेडर जो मार्केट में अभी जल्द ट्रेडिंग करना शुरू किए है. इसमें हम जानेंगे कि ट्रेड लेते समय स्टॉप लॉस और टारगेट कैसे लगाए. How to set Stop Loss and Target in stock.

कई ऐसे ट्रेडर है जो मार्केट में कोई भी ट्रेड लेने से पहले वे पूरा रिसर्च करते है. अपना strategies भी लगा लेते हैं. ट्रेंड लेने के बाद उन्हें प्रॉफिट भी होता है. परंतु टारगेट ना मालूम होने के वजह से बड़ा प्रोफिट बनाने का मौका गंवा देते हैं. ऐसे ही ट्रेड लेते समय स्टॉप लॉस लगाने का तरीका ना मालूम होने के वजह से लॉस कर लेते हैं. या तो स्टॉप लॉस तुरंत हिट हो जाते हैं.

Best stop loss strategy for intraday

ट्रेड प्रोफिट में चल रहा होता हैं. लेकिन प्रॉफिट कहां बुक स्टॉप लॉस कहां होना चाहिए? करना है, ये चीज नहीं पता होने के कारण ट्रेडर अपना लॉस कर लेते हैं. और कई ऐसे भी ट्रेडर का सवाल होता है कि स्टॉप लॉस नहीं लगाया था और एक पॉइंट्स स्टॉक नीचे ही गया था और स्टॉप लॉस लगाने के बारे में सोच ही रहा था की स्टॉक उससे पहले ही नीचे चला गया. ये सब चीजें आपके साथ होती है और अच्छे खासे ट्रेड को आप लॉस में बदल देते हैं.

अगर आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ते हैं, तो स्टॉप लॉस कैसे लगाए, कैसे ट्रेड लेना चाहिए, एक्सपर्ट ट्रेडर कौन सी चीज दिमाग में सोच कर ट्रेड लेते हैं. ऐसा नहीं कि कोई चीज सुनी है तो वही चीज तुरंत पूरी की पूरी कॉपी पेस्ट करनी है. कभी–कभी अपना दिमाग भी लगाना होता है ट्रेड में कुछ भी हो सकता है प्लान A के साथ प्लान B भी होना जरूरी है. हालांकि आपको प्लान B पर तभी जाना है जब प्लान A आपके लिए काम नहीं कर रहा हो.

महत्वपूर्ण पॉइंट

  • जब कैंडल बड़ी बनी हो तो आपको ट्रेड नहीं लेना है. अब आप सोच रहे होंगे कि कितनी बड़ी हो. तो आपको बता दें, यदि कैंडल 1% से बड़ी बनती दिखे. तो आपको को ट्रेड नहीं लेना हैं. आपको ट्रेड में एंट्री तभी लेना हैं जब कैंडल 1% से नीचे हों जैसे 0.5%, 0.8% या फिर 0.9% तक का भी ले सकते हैं.
  • यदि ट्रेड में एंट्री लेने के बाद स्टॉक नीचे जाता है, तो आप यह चेक कर सकते हैं कि 50% fib Retracement पार हुआ है या नहीं। मान लीजिए आपने ट्रेड ले लिया है और हो सकता है कैंडल आपके अनुसार ना move करे और अगली कैंडल Red बन जाए और स्टॉक नीचे जाने लगे. अब आप क्या करेंगे? क्योंकि आपके पास समय भी कम और तुरंत एक्शन भी लेना हैं. आपने स्टॉप लॉस भी लगा दिया है. लेकिन आपको Fibonacci Retracement से भी check करना जरूरी है ये कैसे देखना है नीचे चार्ट में देख सकते हैं.

Target and stop loss for intraday

किसी भी ट्रेड में एंट्री करने से पहले स्टॉप लॉस और टारगेट तय होना चाहिए। जैसे कि ऊपर के पैराग्राफ में आपने देखा कि स्टॉप लॉस और टारगेट कैसे लगाना है तो उसी के हिसाब से किसी भी ट्रेड में एंट्री लेने से पहले stop loss और target तय कर लें. अब प्रोफिट कितना लेना है? ये अलग–अलग ट्रेडर पर निर्भर करता है. आप चाहे स्टॉप लॉस को ट्रेल भी कर सकते हैं जिसे trailing Stop Loss कहा जाता है.स्टॉप लॉस कहां होना चाहिए?

Stoploss and target

Stop Loss क्या होता है?

Stop Loss:- जब भी हम शेयर मार्केट में किसी शेयर को खरीदते हैं तो हमारा उद्देश्य होता है कि जब शेयर की किमत बढ़ जाएगी तब हम उसे बेच देंगे और उससे मुनाफा जो है वह कमा लेंगे, लेकिन हर समय ऐसा नहीं होता कभी-कभी शेयर की प्राइस हमारे खरीदने के बाद कम हो जाती है तो ऐसे नहीं हम क्या करें ऐसे में अगर हम शेयर को नहीं बेचते तो हमें और भी ज्यादा नुकसान हो सकता है इसी नुकसान को कम करने के लिए हम स्टॉपलॉस का उपयोग करते हैं जिसमें हमारे जो हमने खरीदा है उसकी प्राइस एक निश्चित से कम हो जाने पर शेयर ऑटोमेटिक सेल हो जाता है इसी प्राइज को हम स्टॉपलॉस कहते हैं!

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