‘इंडिया स्टैक’ ने ऑनग्रिड के होम पेज से लेकर यह तस्वीर ट्वीट की थी. लोग इसे तुरंत डरावना और अवांछित करार देने लगे. अवांछित इसलिए क्योंकि इसे सबकी निगरानी के लिए आधार के इस्तेमाल के तौर पर देखा गया. इंडिया फीड ने तस्वीर को ट्विटर से तुरंत हटा लिया लेकिन ऑनग्रिड जो कर रहा था उसकी समीक्षा जारी थी. किसी ने ट्वीट कर पूछा, “क्या इसका मतलब यह है किसी व्यक्ति का आधार, पैन, पासपोर्ट जैसे दस्तावेज लिंक हो जाएंगे और आपके सर्वर पर मौजूद रहेंगे?” कंपनी के संस्थापकों में शामिल पीयूष पेशवानी ने जवाब दिया, “अगर सहमति है तो “हां”. आधार की जानकारी इसके मालिक की होती है और निर्णय भी उसी का होगा कि क्या रहे और क्या नहीं.” एक और यूजर ने लिखा, “आपने तस्वीर हटा ली और वही बातें दोबारा सिर्फ शब्दों में कह दी.”

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आधार : नया तेल

यह भीड़-भाड़ वाली एक गली की “ब्लैक एंड व्हाइट” तस्वीर थी जिसके केंद्र में एक आदमी था जो कैमरे में देख रहा फिक्स एपीआई का उपयोग कौन करता है? था. उसका चेहरा कंप्यूटर-जनित बॉक्स के क्रॉसहेयर में फिट बैठा हुआ था जिसमें ढेर सारे मोबाइल नंबर भी थे. इसके अलावा उसमें जन्मतिथि, पता और ऐसी ही फिक्स एपीआई का उपयोग कौन करता है? अन्य निजी जानकारियां थीं. इन सबके ऊपर प्रमुखता से एक 12 अंकों का नंबर दिखाई दे रहा था जिसके चार नंबर जानबूझ कर ढके हुए थे. यह आधार नंबर का एक तरह का प्रस्तुतिकरण यानी दिखाए जाने का तरीका है. यह बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल पहचानकर्ता है और भारत सरकार ने इसे हर किसी पर थोपने की कोशिश की है. भीड़ में कुछ और चेहरे थे जो बॉक्स में कैद थे और जिनके सिर पर आधार नंबर का ताज सजा था. तस्वीर के ऊपर चंद लाइने लिखी थीं, उनमें से एक में लिखा था, “@On_grid टीम में आपका स्वागत है.”

ये शब्द और तस्वीर इंडिया स्टैक के उस ट्वीट का हिस्सा थे जो फरवरी 2017 में किया गया था. इसमें घोषणा की गई थी कि ऑनग्रिड इसे इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं के एक चयनीत समूह से जुड़ा है. इंडिया स्टैक, आधार पर आधारित एक एप्लिकेशन है जो इसे अन्य सेवाओं से जोड़ता है. इसे एपीआई भी कहते हैं, एपीआई एक तरह का कोड होता है जो अलग-अलग प्रोग्रामों के बीच संवाद स्थापित करता था. उदहारण के लिए जब आप ‘बुक माई शो’ से टिकट बुक करते हैं तो जिस पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल होता है उसे ‘एपीआई’ कह सकते हैं. असल में इंडिया स्टैक एपीआई के ब्लॉक तैयार कर रही है जो कई तरह की सेवाएं देने वाली कंपनियों के सॉफ्टवेयर के लिए तैयार किए जा रहे हैं. इसमें फिक्स एपीआई का उपयोग कौन करता है? निजी और सरकारी दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं जिनके सॉफ्टवेयर को इस्तेमाल करने के लिए “आधार” की जरूरत होगी. ऑनग्रिड एक निजी कंपनी है जो मजदूरी करने वाले लोगों को नौकरी देने वाली कंपनियों को, मजदूरों के जीवन से जुड़ी जानकारी मुहैया कराती है. इसके लिए यह कंपनी लोगों के आधार का इस्तेमाल करती है, वहीं अन्य सूत्रों से भी जानकारी इकट्ठा करती है. इसमें आदमी का इतिहास, पृष्ठभूमि जैसी जानकारियां होती हैं.

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