विजय माल्‍या के दफ्तर पर सीबीआई ने मारा छापा, यूबी ग्रुप पर है मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

NSE Co-Location Scam:सीबीआई ने कई शहरों में ब्रोकर्स के 10 से ज्यादा ठिकानों पर की छापामारी

इस मामले में सीबीआई ने NSE की पूर्व सीईओ और एमडी चित्रा रामकृष्ण और ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर आनंद सुब्रमण्यम के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है

साल 2015 में एक व्हिसलब्लोअर ने मार्केट रेगुलेटर SEBI से को-लोकेशन स्कैम की शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि NSE में सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर खूब धांधलेबाजी चल रही है

NSE Co-Location Scam:सीबीआई ने 21 मई को NSE को-लोकेशन घोटाला मामले में देश के कई शहरों में ब्रोकरों के 10 ठिकानों पर छापामारी की है। इस सर्च ऑपरेशन में मुंबई, गांधीनगर, दिल्ली, नोएडा गुरुग्राम, कोलकता और दूसरे शहरों में ब्रोकरों के 12 से ज्यादा ठिकानों की छानबीन की जा रही है।

बता दें कि इस मामले में सीबीआई ने NSE की पूर्व सीईओ और एमडी चित्रा रामकृष्ण और ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर आनंद सुब्रमण्यम के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। हाल ही सीबीएम ग्रुप के साथ ट्रेडिंग में दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले में इन दोनों आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

बता दें कि साल 2015 में एक व्हिसलब्लोअर ने मार्केट सीबीएम ग्रुप के साथ ट्रेडिंग रेगुलेटर SEBI से को-लोकेशन स्कैम की शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि NSE में सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर खूब धांधलेबाजी चल रही है। उसी समय चित्रा का भी नाम सामने आया था। सेबी ने चित्रा को उस वक्त शो कॉज नोटिस भेजा था। SEBI ने बीते दिनों अपनी जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट शेयर की है।

Yes Bank स्कैम: सीबीआई का बड़ा एक्शन, रेडियस ग्रुप के MD की हुई गिरफ्तारी

सीबीआई ने रेडियस समूह के बिल्डर और मैनेजिंग डायरेक्टर संजय छाबड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। रेडियस समूह, डीएचएफएल पर सबसे बड़े कर्जदारों में से एक है। इसी मामले को लेकर सीबीआई ने ये एक्शन लिया है।

Yes Bank स्कैम: सीबीआई का बड़ा एक्शन, रेडियस ग्रुप के MD की हुई गिरफ्तारी

यस बैंक-डीएचएफएल घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल, सीबीआई ने रियल एस्टेट के रेडियस समूह के एमडी संजय छाबड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। अब छाबड़िया को शुक्रवार को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। संजय छाबड़िया की गिरफ्तारी को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे। इसी साल फरवरी माह में सीबीआई ने मुंबई और पुणे में संजय छाबड़िया के नेतृत्व वाले रेडियस डेवलपर्स से जुड़े छह परिसरों की तलाशी ली थी।

क्या है वजह: आपको बता दें कि रेडियस समूह, डीएचएफएल पर सबसे बड़े कर्जदारों में से एक है। इस समूह पर मुंबई में एक आवासीय परियोजना सीबीएम ग्रुप के साथ ट्रेडिंग के लिए लिए गए लगभग 3,000 करोड़ रुपये का बकाया है। सीबीआई ने 2020 में यस बैंक के को-फाउंडर राणा कपूर और डीएचएफएल के कपिल वधावन सहित अन्य के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज किया था।

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कपूर ने डीएचएफएल को यस बैंक के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए वधावन के साथ एक आपराधिक साजिश रची थी। एजेंसी के अनुसार कपूर ने ऐसा खुद के लिए और अपने परिवार के सदस्यों को उनकी कंपनियों के माध्यम से अनुचित लाभ के बदले किया था।

सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, घोटाला अप्रैल और जून 2018 के बीच शुरू हुआ था जब यस बैंक ने डीएचएफएल के अल्पकालिक डिबेंचर में 3,700 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसके अनुसार इसके बदले, वधावन ने कपूर और उनके परिवार के सदस्यों को डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को ऋण के रूप में ‘‘600 करोड़ रुपये की रिश्वत का कथित तौर पर भुगतान’’ किया था।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि कपूर की बेटियां - रोशनी, राधा और राखी - मोगरन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से डीओआईटी अर्बन वेंचर्स की 100 प्रतिशत शेयरधारक हैं। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि डीएचएफएल द्वारा डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को बहुत कम मूल्य वाली संपत्तियों को गिरवी रखने और भविष्य में इसके कृषि भूमि से आवासीय भूमि में रूपांतरित होने पर विचार करते हुए 600 सीबीएम ग्रुप के साथ ट्रेडिंग करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया गया था।

सीबीआई ने दिल्ली की हीरा कारोबार कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया

केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने दिल्ली के एक हीरा कारोबार कंपनी एसएसके ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ पंजाब नैशनल बैंक के साथ 187 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है।

cbi

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विजय माल्‍या के दफ्तर पर सीबीआई ने मारा छापा, यूबी ग्रुप पर है मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

सीबीआई एक मामले की जांच के लिए सोमवार को संकटग्रस्‍त शराब कारोबारी विजय माल्‍या की अगुवाई वाले यूबी समूह के बेगलुुरु स्थित दफ्तर पर छापा मारा।

Abhishek Shrivastava
Updated on: January 23, 2017 18:03 IST

विजय माल्‍या के दफ्तर पर सीबीआई ने मारा छापा, यूबी ग्रुप पर है मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप- India TV Hindi

विजय माल्‍या के दफ्तर पर सीबीआई ने मारा छापा, यूबी ग्रुप पर है मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

बेंगलुरु। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले की जांच के लिए सोमवार को संकटग्रस्‍त शराब कारोबारी विजय माल्‍या की अगुवाई वाले यूबी समूह के बेगलुुरु स्थित दफ्तर पर छापा मारा। विजय माल्या पर किंगफिशर मामले में बैंकों का 6,203 करोड़ रुपए का बकाया है और उन्‍हें एक अदालत ने भगोड़ा अपराधी घोषित किया है।

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, दिल्ली से सीबीआई अधिकारियों का एक दल बेंगलुरु में यूबी समूह के दफ्तरों में पहुंचा। हालांकि, अधिकारी ने इससे ज्यादा कोई ब्योरा नहीं दिया।

सीबीआई ने किया बड़ा खुलासा

कानपुर: जांच एजेंसी सीबीआई ने कानपुर में एक और बड़े घोटाले का खुलासा किया है. रोटोमैक कंपनी ने चार कंपनियों से 26000 करोड़ का कारोबार किया और खास बात यह थी कि इन चारों कंपनियों का पता एक है और कर्मचारी भी एक ही है. सीबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि कैसे एक कर्मचारी वाली कंपनियों से कारोबार के आधार पर रोटोमैक को 2100 करोड़ का कर्ज दिया गया. इस खुलासे के बाद सीबीआई भी हैरान रह गई है. जांच में पता चला कि रोटोमैक ने सिर्फ चार कंपनियों के साथ 26,143 करोड़ रुपये का कारोबार किया था. इन कंपनियों का पता भी एक है, जो 1500 वर्ग फुट का हॉल है. हैरानी की बात यह है कि इन चारों कंपनियों में वही कर्मचारी है, जो कंपनी का सीईओ भी है. इन कंपनियों के साथ हो रहे अरबों रुपये के कारोबार के आधार पर बैंकों ने रोटोमैक को 2100 करोड़ रुपये का कर्ज भी दिया था. सीबीआई ने आरोप लगाया है कि निदेशकों विक्रम कोठारी (मौत हो चुकी है) और राहुल कोठारी ने अन्य लोगों के साथ अपनी बैलेंसशीट के साथ फर्जीवाड़ा करके बैंक को धोखा दिया और इन्होंने बेईमानी से लोन ले लिया. पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर सीबीआई ने रोटोमैक ग्लोबल के निदेशक राहुल कोठारी, साधना कोठारी और अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ 93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का नया मामला दर्ज किया है. सीबीआई के मुताबिक, रोटोमैक ग्रुप के साथ कारोबार करने सीबीएम ग्रुप के साथ ट्रेडिंग वाली चार कंपनियां रोटोमैक के सीईओ राजीव कामदार के भाई प्रेमल प्रफुल कामदार के स्वामित्व में हैं. रोटोमैक ने इन चार कंपनियों को कागज में उत्पादों का निर्यात किया, ये सभी कंपनियां बंज ग्रुप से रोटोमैक को सामान बेच रही थीं यानी जिस कंपनी ने सामान बनाया वह उसका माल खरीद रही थी. इन चार कंपनियों के नाम हैं- मैग्नम मल्टी-ट्रेड, ट्रायम्फ इंटरनेशनल, पैसिफिक यूनिवर्सल जनरल ट्रेडिंग और पैसिफिक ग्लोबल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड. खास बात है कि 26000 करोड़ का कारोबार करने वाली कंपनियों का 1500 वर्ग फुट में एक ही और सिंगल ऑफिस था. पीएनबी की शिकायत पर मंगलवार को नई एफआईआर दर्ज की गई, केवल सामान बनाने वाली कंपनी ही अपना सामान खरीदने में लगी हुई थी. सीबीआई जांच में सामने आया कि 26 हजार करोड़ का कारोबार दिखाने वाली चार कंपनियों में एक ही कर्मचारी था, जिसका नाम प्रेमल प्रफुल्ल कामदार था.1500 वर्ग फुट के एक कमरे में बैठा वह पोर्ट से लेकर लोडिंग, अनलोडिंग तक का सारा काम कर रहा था. सीबीआई ने हैरानी जताई कि बैंकों ने ऐसी कंपनी से कारोबार के आधार पर 2100 करोड़ रुपये की कर्ज सीमा कैसे दे दी. यही वजह है कि बैंक अधिकारियों को भी संदेह के घेरे में रखा गया है. अधिकारियों ने कहा कि रोटोमैक समूह की कंपनियां पहले से ही सात बैंकों के एक संघ से 3,695 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ इंडिया से 806.75 करोड़ रुपये के लोन घोटाले में जांच का सामना कर रही है.

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