एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नेताओं ने युद्ध की निंदा, मुक्त व्यापार की पैरोकारी की

इस मौके पर जारी घोषणा पत्र में युद्ध के मुद्दे पर मतभेदों को स्वीकार किया गया और कहा गया कि मंच मुख्य रूप से व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। साथ ही कहा गया कि एपीईसी ऐसे संघर्षों को हल करने का स्थान नहीं है।

घोषणा पत्र में यह भी कहा गया कि युद्ध और दूसरे सुरक्षा संबंधी मुद्दे ”वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहमियत रखते हैं।”

घोषणा पत्र में कहा गया कि अधिकांश सदस्यों ने यूक्रेन में युद्ध की कड़ी निंदा की और जोर देकर कहा कि यह अत्यधिक मानवीय पीड़ा और बढ़ती मुद्रास्फीति, आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं, खाद्य संकट और वित्तीय जोखिम की वजह बन रहा है।

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नेताओं ने युद्ध की निंदा, मुक्त व्यापार की पैरोकारी की

इस मौके पर जारी घोषणा पत्र में युद्ध के मुद्दे पर मतभेदों को स्वीकार किया गया और कहा गया कि मंच मुख्य रूप से व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। साथ ही कहा गया कि एपीईसी ऐसे संघर्षों को हल करने का स्थान नहीं है।

घोषणा पत्र में यह भी कहा गया कि युद्ध और दूसरे सुरक्षा संबंधी मुद्दे ”वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहमियत रखते हैं।”

घोषणा पत्र में कहा गया कि अधिकांश सदस्यों ने यूक्रेन में युद्ध की कड़ी निंदा की और जोर देकर कहा कि यह अत्यधिक मानवीय पीड़ा और बढ़ती मुद्रास्फीति, आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं, खाद्य संकट और वित्तीय जोखिम की वजह बन रहा है।

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India-EU Trade Pact: अब झुका EU, 8 साल बाद भारत से इस डील के लिए बढ़ाया हाथ!

India-EU Trade Pact : भारत और यूरोपीय संघ के बीच आठ साल के बाद व्यापार समझौते पर बातचीत की शुरुआत हुई है. दोनों पक्ष मुक्त व्यापार अनुबंध को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं. अगले दौर की बातचीत नई दिल्ली में 27 जून से होनी है.

भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2022,
  • (अपडेटेड 18 जून 2022, 6:55 PM IST)
  • 27 जून से भारत में होगी बातचीत
  • 2013 में ठप पड़ गई थी बातचीत

भारत और यूरोपीय संघ (European Union) ने आपस में व्यापार बढ़ाने के लिए बातचीत शुरू कर दी है. इसमें व्यापार, निवेश और भौगोलिक संकेतों (GI Tag) समेत अन्य प्रस्तावित समझौतों के लिए आधिकारिक बातचीत की शुरुआत हो गई है. इस बारे में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) का कहना है कि इस कदम से दोनों पक्षों को फायदा होगा. मुक्त व्यापार (Free Trade Agreement) जैसे समझौते से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा. भारत और यूरोपीय संघ ने 17 जून को आठ साल के लंबे अंतराल के बाद औपचारिक रूप से प्रस्तावित समझौतों पर फिर से बातचीत की शुरुआत की है.

मुक्त व्यापार समझौता

गोयल ने कहा कि वे यूरोपीय संघ और भारत के बीच एक निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत करने के लिए ब्रसेल्स आए थे. पिछले कुछ महीनों में हमारे द्विपक्षीय व्यापार में काफी बढ़ोतरी हुई है. इन तीन समझौतों के बाद अब हम अब तक छूटी रहीं संभावनाओं का भी सही से इस्तेमाल कर सकेंगे. ये तीन समझौते व्यापार, जोखिम मुक्त व्यापार क्या है? निवेश और जीआई से संबंधित हैं.

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भारत ने 2007 में 27 देशों के आर्थिक ब्लॉक के साथ 'द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते' (BTIA) पर बातचीत शुरू की थी, लेकिन वाहनों पर सीमा शुल्क जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई. इस वजह से 2013 में बातचीत ठप पड़ गई. अब 8 साल बाद एक बार फिर से दोनों पक्षों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हुई है.

नई तकनीक और निवेश

भारतीय पक्ष की प्रमुख मांगों के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि भारत आधुनिक उत्पादों पर दुनिया के साथ जुड़ना चाहता है और उन क्षेत्रों को देखना चाहता है जहां वह नई तकनीक और निवेश के मामले में लाभ उठा सके. उन्होंने कहा कि सभी कार्ड टेबल पर हैं और हम खुले दिल और खुले दिमाग के साथ बातचीत कर रहे हैं. समझौतों को हमेशा लाभ या मांगों के बारे में नहीं होना चाहिए.

भारत में होगी बातचीत

यूरोपियन कमीशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष वाल्डिस डोम्ब्रोव्स्की ने कहा कि दोनों पक्ष एक महत्वाकांक्षी और व्यापक एफटीए का लक्ष्य बना रहे हैं. उन्होंने बताया कि अगले दौर की बातचीत नई दिल्ली में होगी. यह 27 जून से एक जुलाई तक चलेगी. हमारा उद्देश्य 2023 के अंत तक वार्ता पूरी करने का है.

दोनों पक्षों के बीच कारोबार

भारत और यूरोपीय संघ के बीच पहले से ही कारोबार होता आया है. दोनों देश महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं. दोनों के बीच 120 अरब यूरो का सालाना व्यापार होता है. भारत के लिए यूरोपीय संघ तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है. 2021 में कुल भारतीय कारोबार में उसकी हिस्सेदारी लगभग 11 फीसदी थी. वहीं 2021 में यूरोपीय संघ के कुल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 2 फीसदी से कुछ अधिक रही थी.

जीआई मुख्य रूप से कृषि, प्राकृतिक या निर्मित उत्पाद (हैंडक्राफ्ट और औद्योगिक प्रोडक्ट) की पहचान स्थापित करता है. ये टैग उस वस्तु या उत्पाद को उसकी निश्चित भौगोलिक पहचान देता है. भारत में दार्जिलिंग चाय, चंदेरी साड़ी, मैसूर रेशम, कुल्लू शॉल, बीकानेरी भुजिया, कांगड़ा चाय, तंजावुर पेंटिंग, इलाहाबादी सुरखा, फर्रुखाबाद प्रिंट और कोल्हापुरी चप्पल जैसी कई वस्तुओं को जीआई टैग हासिल है.

Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP) क्या है?

13 फरवरी, 2022 से भारतीय विदेश मंत्री की मनीला की तीन दिवसीय यात्रा से पहले फिलीपींस ने यह निर्णय लिया है। भारत और फिलीपींस द्वारा जनवरी 2022 में 374.96 मिलियन अमरीकी डालर के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद यह यात्रा निर्धारित की गई थी। इस सौदे के तहत भारत फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्यात करेगा।

FFF द्वारा स्थिति पत्र

देश के Federation of Free Farmers (FFF) ने एक स्थिति पत्र जारी किया और किसानों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श की कमी के कारण देश की सीनेट जोखिम मुक्त व्यापार क्या है? से मुक्त व्यापार समझौते की सहमति को स्थगित करने का आग्रह किया। इसने प्रस्तावित RCEP नियमों पर भी चेतावनी दी जो “व्यापार उपायों की प्रभावशीलता और आवेदन में बाधा उत्पन्न करेंगे”।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी ( Regional Comprehensive Economic Partnership – RCEP )

RCEP ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, चीन, कंबोडिया, जापान, इंडोनेशिया, लाओस, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, मलेशिया, फिलीपींस, न्यूजीलैंड, थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम के एशिया-प्रशांत देशों के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता है। RCEP के 15 सदस्य देशों में दुनिया की आबादी का लगभग 30% और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 30% हिस्सा है। इस प्रकार, RCEP इतिहास का सबसे बड़ा व्यापार ब्लॉक है। यह पहला मुक्त व्यापार समझौता है जिसमें चीन, जापान, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया सहित एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।

RCEP कब पेश किया गया था?

RCEP को पहली बार नवंबर 2011 में इंडोनेशिया के बाली में 19 वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान पेश किया गया था। इसके लिए बातचीत 2013 की शुरुआत में शुरू हुई थी।

क्या भारत RCEP का सदस्य है?

मूल रूप से, भारत 2011 में RCEP मसौदा समिति का सदस्य था। हालाँकि, 2019 में, भारत ने कुछ चिंताओं का हवाला देते हुए समझौते से बाहर होने का निर्णय लिया। इन चिंताओं में घरेलू उद्योगों को आयात से उत्पन्न जोखिम भी शामिल था।

RCEP का उद्देश्य

इस मुक्त व्यापार समझौते का उद्देश्य आसियान सदस्य देशों और FTA भागीदारों को उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध कराना है। यह 20 वर्षों में टैरिफ की सीमा को भी समाप्त कर देगा।

व्यापार

Swachh Bharat Abhiyaan: Ek Kadam Swachhata Ki Ore 150 years of celebrating the mahatma

पशुपालन और डेयरी विभाग पशुधन और पशुधन उत्पादों का आयात, पशुधन आयात अधिनियम, 1898 की धारा 3 और धारा 3अ के प्रावधानों के अनुसार नियंत्रित करता है ताकि ऐसे पशुधन और पशुधन उत्पादों के आयात से विदेशी बीमारियों का प्रवेश रोका जा सके।

ईएक्सआईएम नीति के अनुसार जीवित पशुओं का आयात प्रतिबंधित वर्ग की सूची (यह आयात के लिए स्वतंत्र नहीं है) के तहत आता है जिसके लिए आयातक को विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) से लाइसेंस लेना होता है। डीजीएफटी, प्रस्ताव की जांच करने और जोखिम विश्लेषण करने के बाद इस विभाग की सिफारिशों पर लाइसेंस जारी करता है। ईएक्सआईएम नीति के अलावा, केंद्र सरकार के पास पशुधन आयात अधिनियम 1898 की धारा 3 के अनुसार जीवित पशुओं के आयात को नियंत्रित, प्रतिबंधित और निषेधित करने की शक्ति है। पशुपालन और डेयरी विभाग ने पशुधन आयात अधिनियम की धारा 3 के तहत दिनांक 10 जून, 2014 को अधिसूचनाएं एस.ओ. 1495(ई) और 1496(ई) जारी की हैं। इन अधिसूचनाओं के जरिए, विभाग ने पशुओं के उन वर्गों को अधिसूचित किया‍ है जिन्हें‘’पशुधन’’माना जा सकता है और जीवित पशुओं के लिए आयात और संगरोधन प्रक्रिया भी निर्धारित की है।

ईएक्सआईएम नीति के तहत पशुधन उत्पादों को ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) श्रेणी कैटेगरी में रखा गया है। ईएक्सआईएम नीति के अलावा, केंद्र सरकार के पास पशुधन आयात अधिनियम 1898 की धारा-3ए के अनुसार पशुधन उत्पादों के आयात को नियंत्रित, प्रतिबंधित और निषेध करने की शक्ति है। इस संबंध में, विभाग ने पशुधन उत्पादों की सूची और पशुधन उत्पादों के आयात की प्रक्रिया की 17 अक्टूबर, 2015 को अधिसूचना एसओ 2666 (ई) जारी की है। इन उत्पादों के आयात की अनुमति तभी दी जा सकती है जब उनके पास सेनेट्री इंपोर्ट परमिट हो, जो आयात के जोखिम विश्लेषण की जांच के बाद विभाग जारी करता है। मूल देश से भेजे जाने से पहले सेनेट्री इंपोर्ट परमिट (एसआईपी) है। पशुधन उत्पादों के आयात जोखिम विश्लेषण की जांच के आधार पर विभाग पशुधन उत्पादों के लिए एसआईपी जारी करता है। उत्पाद की प्रकृति के अनुसार परमिट एक साल या छह महीने के लिए वैध होते हैं और इनका उपयोग एक से ज्या‍दा बार प्रेषण के लिए उपयोग किया जोखिम मुक्त व्यापार क्या है? जा सकता है।

सेनेट्री इंपोर्ट परमिट कोई लाइसेंस नहीं है, बल्कि यह भारत की स्वच्छता आवश्यकताओं को प्रमाणित करने वाला एक प्रमाण-पत्र है।

पशु और पशु उत्पादों के आयात की अनुमति समुद्री पोर्टों /बेंगलुरू, चेन्नई, दिल्ली , हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई के हवाई अड्डे से ही है जहां पशुओं के संगरोधन और प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध है। मत्स्य उत्पादों का आयात विशाखापट्टनम (आंध्रप्रदेश राज्य में) के समुद्र पोर्ट, कोचि के समुद्र पोर्ट और हवाई अड्डे और पेट्रापोल के भू-सीमा स्टेशन (सिर्फ बांग्लादेश से आयात के लिए) से किया जा सकता है।

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